सुनामी उपन्यास
लोगों से खचाखच भरा शहर , शहर के एक ओर अमीरों की बस्ती जहां लगभग सभी धनी लोग रहते हैं।कुछ एक लोग हैं लेकिन वो भी उपरी दर्जे के मध्यम वर्ग के। उसी बस्ती में रोहित का घर है। वह अपने कमरे में अपनी नन्ही सी बहन के साथ खेल रहा है।कभी वह उसे अपनी गोद में उठा रहा है तो कभी उसे खिलौने दिखाकर उसका मन बहला रहा है। रोहित भी अभी बच्चा ही है शायद पांच छ: साल का होगा। वह एक मंहगे अंग्रेजी स्कूल में पढता है। माता -पिता दोनों नौकरी करते हैं। इसलिए बच्चों के साथ रहने का उन्हें ज्यादा समय नहीं मिलता। घर में बच्चों की देखभाल के लिए एक नौकरानी रखी है और घर के दूसरे काम भी करती है। रोहित को पढाने के लिए एक व्यक्ति आता है जो उसके स्कूल द्वारा दिए गए होम वर्क को पूरा करवाने में उसकी सहायता करता है। दिवार पर लगी घडी घंटे की सुई के चार पर पहुंचते ही झनझना उठती है। घर के किसी कमरे से आवाज आती है ' रोहित बेटा ट्यूशन का समय हो गया है। गुरूजी स्टडी रूम में इंतजार कर रहे होंगे।' रोहित उठता है और जाते जाते अपने हाथों से अपनी बहन के गालों को स्पर्श करते हुए वहां से निकल जाता है। वह एक कविता गुनगुनाते हुए बच्चों की स्वभाविक चाल में अपने स्टडी रूम में पहुंचता है।
इन द स्काई
ट्राई टू फ्लाई
इट इज योअर
दैट इज भाए
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