डायरी को देखने के बाद ' अब दिखाओ मैथ की नोटबुक और कंप्यूटर की भी बाहर निकाल लो। मैथ की नोटबुक देखने के बाद बाकि का काम करवाने में व्यस्त हो जाते हैं। काम पूरा हो जाने के बाद रोहित कहता है। हमारे स्कूल में कल एक समारोह है। टीचर ने एक कविता तैयार करने के लिए कहा है। और कहा जिसकी कविता सबसे अच्छी होगी उसे ईनाम भी मिलेगा।
यह तो बहुत अच्छी बात है गुरु जी ने कहा।
रोहित उदासी भरे स्वर कहता है लेकिन मेरे पास तो कोई कविता नहीं है। और न ही मुझे लिखने आती है।
गुरु जी ने यकीन दिलाते हुए कहा, कोई बात नहीं मैं तुम्हे कविता लिख कर दूंगा।
'प्रोमिस ' रोहित ने खुशी से उछल कर कहा।
बेटा इसमें  प्रोमिस की क्या बात है कहा न कि मैं तुम्हे कविता लिख कर दूंगा।
अच्छा चलो बताओ कविता का शीर्षक क्या है?
कविता का टोपिक ' सुनामी ' है। सुनामी पर कविता तैयार करने को कहा है।

सुनामी का नाम सुनते ही गुरु जी सुन्न से हो जाते हैं। उनकी आँखे दीवार पर स्थिर सी हो जाती हैं जैसे वो दीवार को बहुत दिनों के बाद देख रहें हो ।वे खडे तो कमरे में हैं लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा कि उनकी रूह किसी ओर जगह पर विचरण कर रही है।उनके चेहरे पर पता नहीं कितने ही भाव चढ और उतर रहे हैं।ऐसा लग रहा है जैसे उनके हृदय में किन्ही पुरानी यादों का समुन्द्र हिलोरे मार रहा हो ऐसा लग रहा था कि वे यादों की अनन्त गहराईयों में चले गए हों । रोहित को जब अपने प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलने की सूरत में गुरु जी की तरफ नजर दौडाई। गुरु जी एक टक दीवार से नजरें टिकाए खडे थे।
रोहित ने गुरु जी का हाथ पकडा और हाथ हिलाते हुए पूछा।
गुरु जी। गुरु जी।
गुरु जी स्मृतियों से बाहर निकाले।
रोहित ने फिर पूछा , गुरु जी क्या हुआ ?..

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