लाईक ए क्लाउड
थिंक ब्राउड
यू फोर ऑल
ऑल आर योअर
गुरु जी समय के बहुत पाबंद थे।सूरज के निकलने में देर हो सकती है लेकिन उनके आने में देरी नहीं हो सकती। गुरु जी आध्यात्मवाद में विश्वास रखने वाला व्यक्ति है। उन्होने अभी शादी नहीं की है। उनके चेहरे पर एक अद्दभुत कांती झलकती है। साडे पांच फीट के करीब उनका कद है। उनकी आँखो में एक अजीब सी चमक है। वे फीके पीले रंग के बिलकुल साधारण कपडे पहनते है जो उनके पूरे शरीर को ढके रहते हैं। वह किसी भी कोण से एक आडम्बरी बाबा प्रतीत नहीं होते और न ही उनकी बातों से जिंदगी के प्रति को असंतुष्टि की भावना झलकती है। वह भीख मांगना पसंद नहीं करते इसलिए बच्चों को टियूशन पढाते हैं। अमीर घर के बच्चों से वे पढाने की फीस लेते हैं। लेकिन गरीब बच्चों से किसी प्रकार की फीस नहीं लेते। यदा - कदा वे उनकी सहायता अवश्य कर देते हैं। उनके व्यक्तित्व को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वे एक संपन्न खानदान में पैदा हुए होंगे। उन्होने लगभग अपनी सभी इंद्रीयों को अपने काबू में कर लिया है।धन -दौलत के लिए उनके मन में जरा भी जगह नहीं है।उनकी जरूरतें भी बहुत कम हैं। रहने के लिए मंदिर है जिसमें रोजाना पुजारी की भूमिका भी निभाते हैं।अपनी जरूरतों के लिए वह टियूशन से कमाए हुए धन का प्रयोग करते हैं। उनके व्यक्तित्व को देखकर नहीं लगता कि उन्होने कभी मंदिर के दानपात्र से निकाले हुए धन से कभी अपनी भूख मिटाने के लिए कोई रोटी खाई हो। दानपात्र से प्राप्त धन को वे मंदिर के रखाब में और समाजसेवा के लिए उपयोग करते हैं । और साल में एक बार भंडारा भी लगाते हैं ।
उनकी बातों से लगता है कि कि उन्होने काफी उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त की है किन्तु उन्होने कभी इस बात का जिक्र नहीं किया। उनका व्यवहारिक ज्ञान भी बहुत अच्छा है। वह दसवीं तक के विद्यार्थी को कोई भी विषय बिना की गाईड का सहारा लिए पढा सकते हैं। इसके साथ- साथ वे बच्चों को अध्यात्मिक शिक्षा भी देते हैं। वे बच्चों में अच्छे गुण विकसित करने की पूरी कोशिश करते हैं।
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