गुरु जी कमरे पहुंच चुके है वह स्टडी टेबल पर रखी हुई पत्रिका देख रहे हैं। शायद इसमें उन्हें कोई लेख अच्छा लग रहा है जिसे वह पढने लगता ही है कि रोहित वहां आ पहुंचता है।
' गुरु जी नमस्ते।'
गुरु जी मैगजीन को बंद करते हुए कहता है
' नमस्ते बेटा'
' बहुत अच्छी कविता गुनगुना रहे थे।'
' टीचर ने याद करने के लिए दी थी।'
' हो गई याद ।'
' हां गुरु जी । सुनाऊं ? रोहित ने विशवास भरे स्वर में कहा।
और फिर झट से वह गुरु जी की स्वकृति बिना ही जल्दी - जल्दी कविता सुनाने लगा।
' इन द स्काई
ट्राई टू फ्लाई.....
गुरु जी मुस्कुराते हुए ' बस - बस बेटा कविता तो मैंने तेरे यहां पहुंचने से पहले ही सुन ली थी। शाबाश ! एेसे ही याद किया करो। '
गर्व से नथुने फुलाते हुए रोहित ने कहा ' थैंक यू गुरु जी।'
' अच्छा यह बताओ आज क्या पढना है ? आज क्या होम वर्क मिला है ?'
रोहित बहादुरी जताते हुए कहता है ' मैथ का होम वर्क मैंने स्कूल में ही खाली समय में कर लिया था।
पहले कंप्यूटर और हिंदी का काम करते हैं।'
' पहले तुम मुझे अपनी होम वर्क वाली डायरी दिखाओ।बाकि का काम बाद में देखते हैं।'
रोहित अपने स्कूल बैग से डायरी गुरु जी को दे देता है।
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