कुछ नहीं बेटा । बस यूंही अतीत में चला गया था।यह अतीत भी अजीब होता है। इंसान का पीछा ही नहीं छोडता इंसान कुछ कटु अनुभवों को भूलना चाहता है । लेकिन यह मन है कि न चाहते हुए भी बस थोडे से सुराग के सहारे उडान भर कर अतीत की डाली पर जा बैठता है। और आँसूओं के दानों को बडी हसरत भरी निगाहों से देखने लगता है। बीती हुई घटनाओं या बीती हुई बातों को याद करना मनोविकार है या भूल जाना इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता । हां मगर इतना जरूर है कि बीते समय को भूल जाना बहुत कठिन होता है यदि उस समय ने हमारे जीवन को आंशिक या पूरी तरह से बदल दिया हो । लेकिन ऐसी यादें जो हर पल दर्द और आंसू ही दे उनको भूल जाना ही बेहतर होता है। जो यादें मन को सकून पहुंचाए साधारण इँसान को उन यादों को हृदय की गठरी में समेट कर रख लेना चाहिए क्योंकि यही यादें उनके समस्त जीवन की जमा पूंजी होती है।
रोहित को गुरु जी की कोई बात समझ नहीं आ रही थी। वह नहीं समझ पा रहा था कि गुरु जी क्या बोल रहे हैं । लेकिन वह इतना जरूर समझ गया था कि सुनामी का नाम सुनकर गुरु जी कुछ खो से गए थे। और यह सब बातें उस शब्द के इर्द - गिर्द घूमती हैं।
रोहित ने बडी जिज्ञासापूर्वक पूछा  ' गुरु जी मुझे आपकी कोई भी बात समझ में नहीं आ रही।'
बेटा कुछ बातें एक दम समझ नहीं आती। फिर सामान्य स्थिती में आते हुए गुरु जी ने कहा , ' छोडो इन बातों को । कविता तो हम लिख ही लेगें । तुम निश्चिंत रहो।
लेकिन गुरु जी लिखेंगे कब ?
चलो अभी लिखना शुरू करते हैं। पहले तुम कागज और पैंसिल निकालो।
रोहित अपने बैग से कागज और पैंसिल निकाल कर गुरु जी को देता है। और बडी जिज्ञासापूर्वक पूछता है।
गुरु जी यह सुनामी होती कैसी है?
बेटा इसकी परिभाषा तो मैं नहीं जानता पर इतना जरूर जानता हूँ। जब सुनामी आती है तो समुन्द्र की लहरे अपनी सीमाएं लाँघ जाती हैं। उँची - उँची लहरें उठती हैं और नजदीक के भू भाग को अपनी चपेट में ले लेती हैं । द्वीपों के द्वीप पानी में डूब जाते हैं। समुंद्र के किनारे बसे शहर तहस - नहस हो जाते हैं ।सब कुछ खत्म हो जाता है शेष रहता है तो केबल भयानक दृष्य।ऐसा दृष्य जिसे देखकर क्रूर से क्रूर इंसान की भी रूह कांप जाए।

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